Thursday, 19 January 2017

Safalta ka rahasya

सफलता का रहस्य



इस दुनिया में हर व्यक्ति कुछ न कुछ कार्य करता है, सबके अपने-अपने लक्ष्य होते हैं। हर एक के मन का सपना होता है कि वह सफल हो, सफलता उसके कदम चूमे परन्तु सबको सफलता नही मिल पाती है। सफलता कठिन परिश्रम व लगन का फल है ,इसके लिए जी-जान से मेहनत करना होता है।  अपनी बात को और अधिक बोधगम्य बनाने के लिए एक छोटी सी कहानी सुनाना चाहूँगा। यह कहानी यूनानी दार्शनिक सुकरात और एक नवयुवक के बीच घटी घटना का अंश है।

कहते हैं कि एक बार एक नवयुवक
यूनान के दार्शनिक सुकरात के पास आया और उनसे पूछा कि "सफलता का रहस्य"  क्या है? सुकरात ने उस नवयुवक से कहा कि कल मुझे तुम नदी के पास मिलो। नवयुवक ने कहा "ठीक है।' अगले दिन नवयुवक नदी के पास पहुंचा। सुकरात ने उससे आगे नदी की ओर बढ़ने को कहा। नवयुवक ने वैसा ही किया। जब पानी गले के पास तक पहुंच गया तो सुकरात ने उसका सर पकड़कर पानी में डुबो दिया। नवयुवक तड़पने लगा और अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष करने लगा। सुकरात ने उसे तब तक डुबोये रखा जब तक कि वो नीला नहीं पड़ गया। फिर उसे छोड़ते हुए कहा यही सफलता का रहस्य है।

नवयुवक ने कहा वो कैसे? सुकरात ने कहा कि जब तुम पानी के अंदर थे तो सबसे ज्यादा क्या चाहते थे? उस नवयुवक ने कहा "सांस लेना...!" सुकरात ने कहा बिलकुल इसी तरह जब तुम सफलता को चाह लोगे तो सफलता तुम्हे मिल जाएगी।

इस कहानी से यह निष्कर्ष निकलता है कि यदि हम किसी कार्य को करने में अपनी सम्पूर्ण ऊर्जा,सम्पूर्ण धैर्यशक्ति लगा दें तो हमे सफलता अवश्य मिलेगी। ऐसी संकल्पशक्ति से कार्य करने वालों के लिए कहा गया है कि-
"कदम चूम लेगी स्वयं आके मंजिल
ज़रा पाँव अपना बढ़ाकर तो देखो।"


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