Monday, 16 January 2017

जीवन के संघर्ष


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एक बार एक बेटी अपने पिता से शिकायत करती है कि उसका जीवन काफी तकलीफदेह है, उसे नहीं पता उसके जीवन का रुख किस ओर है और कैसे वो आगे अपने जीवन का सफ़र तय करेगी। हर समय के संघर्ष और लड़ाई से वह थक चुकी थी। कभी-कभी ऐसा प्रतीत होता है कि मानो एक समस्या का समाधान हुआ नहीं कि दूसरी मुँह फैलाए खड़ी है। उसके पिता एक रसोइया थे। वे उसे अपने साथ अपने किचन में ले गए। लड़की के पिता ने तीन बर्तन लिए और उनमें पानी भर कर उनको ऊँची आँच पर रख दिया।


 जब तीनों बर्तनों में रखा पानी उबलने लगा, तब
उन्होंने पहले बर्तन में कुछ आलू, दुसरे बर्तन में कुछ अंडे और तीसरे बर्तन में कॉफ़ी के बीज डाल दिए और उन्हें उबलने के लिए छोड़ते हुए बिना अपनी बेटी से एक शब्द बोले आराम से बैठ गए। बेटी चकित हो जाती है कि आखिर पिताजी ये सब क्या कर रहे हैं और अधीरतापूर्वक प्रतीक्षा करती है। 20 मिनट बाद उसके पिता बर्नर को बंद कर देते हैं। उन्होंने आलू को बर्तन से बाहर निकालकर एक कटोरे में रख दिया। उन्होंने अंडों को बर्तन से निकालते हुए दूसरे कटोरे में रख दिया। और उसके बाद उन्होंने कॉफ़ी को बाहर परसते हुए एक कप में डाल दिया।


 तब वे अपनी बेटी की ओर मुड़े, और उससे पूछा, "बेटी, तुम क्या देखती हो?"
"आलू, अंडे और कॉफ़ी..!", वह शीघ्रता से जवाब देती है।

 "ध्यान से देखो", उन्होंने कहा। "और आलू को छूकर देखो" लड़की ठीक वैसा ही करती है और गौर करती है की वे मुलायम हैं।
 तब वे अपनी बेटी को एक अंडा लेने को कहते हैं उसे तोड़ने को बोलते हैं। जब लड़की अंडे को तोड़ते हुए उसके बाहरी कवच को हटाती है, तो उसे अन्दर एक कठोर उबला हुआ अंडा मिलता है। अंत में उसके पिता उसे कॉफ़ी की एक चुस्की लेने को कहते हैं। कॉफ़ी की मीठी सुगंध उसके चेहरे पर मुस्कान ले आती है। "पिताजी, इन सबका क्या मतलब है?" वह पूछती है। तब उन्होंने उसे समझाया कि आलू, अंडे और कॉफ़ी के बीजों ने एक ही प्रकार की मुसीबत (उबले पानी) का सामना किया। फिर भी, प्रत्येक ने भिन्न व्यवहार प्रदर्शित किया। आलू मजबूत, कठोर एवं सख्त थे, लेकिन जब ये उबलते पानी में गए तो मुलायम और कमज़ोर हो गए। अंडे नाजुक थे तथा इनके अंदर के द्रव्य को सुरक्षा प्रदान करने के लिए इनके बाहर छिलके की एक पतली परत थी। लेकिन जब ये उबलते पानी में डाले गए तब इनका आंतरिक भाग अर्थात् द्रव्य कठोर बन गया। इन सब से अलग कॉफ़ी के बीज अद्वितीय थे। जब वे उबलते पानी में डाले गए, तब उन्होंने पानी को ही बदल दिया और एक नयी रचना की।
 "तुम इनमे से कौन हो?", वह अपनी बेटी से पूछता है। "जब मुसीबत तुम्हारे दरवाज़े पर आएगी तब तुम किस प्रकार की प्रतिक्रिया दोगी? तुम एक आलू, एक अंडा या एक कॉफ़ी के बीज में से क्या बनना पसंद करोगी...??"


  मोरल : जीवन में, हमारे चारों ओर व हमारे साथ बहुत सी घटनाए घटित होती हैं, लेकिन इकलौती चीज़ जो वास्तव में महत्त्व रखती है वह यह है कि हम किस प्रकार की प्रतिक्रिया देना पसंद करते हैं और इनसे हम क्या निष्कर्ष निकालते हैं। जिंदगी महज सभी प्रकार के संघर्षों को सकारात्मक रूप में बदलना व उन्हें स्वीकार करना मात्र है।

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